वेदों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, समय का सदुपयोग तभी संभव है जब हम उसके शुभ और अशुभ पक्षों को जानकर कोई कार्य करें। हिंदू पंचांग की सहायता से हम दिन, तिथि, नक्षत्र, योग और ग्रहों की चाल को समझकर अपने कार्यों की योजना बना सकते हैं। 11 मई 2025 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अत्यंत विशेष है, क्योंकि इस दिन रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं।
तिथि और नक्षत्र की विशेषता
11 मई 2025 को चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 9:15 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी। इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेंगे और चित्रा नक्षत्र विद्यमान रहेगा। चित्रा नक्षत्र का संबंध निर्माण, सौंदर्य और शुभ कार्यों से होता है। इस नक्षत्र में आरंभ किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक मानी जाती है।
शुभ योगों का दुर्लभ संयोग
रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का एक साथ होना इसे विशेष बनाता है।
-
रवि योग: सूर्य और चंद्रमा के विशेष संयोग से निर्मित यह योग हर कार्य को सिद्ध बनाने की क्षमता रखता है।
-
सर्वार्थ सिद्धि योग: यह योग नाम के अनुरूप सभी कार्यों की सिद्धि के लिए अनुकूल माना जाता है। व्यवसाय, शिक्षा, यात्रा या खरीदारी—हर क्षेत्र में यह योग शुभ फल देता है।
शुभ मुहूर्त और राहुकाल
11 मई को अभिजीत मुहूर्त दिन के सबसे शुभ समय में आता है:
-
अभिजीत मुहूर्त: 11:49 AM से 12:58 PM तक।
-
राहुकाल: किसी भी शुभ कार्य से पहले राहुकाल का ध्यान रखना आवश्यक होता है। शहरों के अनुसार इसका समय अलग-अलग होता है, जैसे:
-
दिल्ली: 03:38 PM से 05:19 PM
-
मुंबई: 03:49 PM से 05:25 PM
-
लखनऊ: 03:22 PM से 05:02 PM
-
कोलकाता: 02:49 PM से 04:27 PM
-
सूर्य और चंद्र की स्थिति
-
सूर्योदय: प्रातः 5:36 बजे
-
सूर्यास्त: सायं 6:59 बजे
इन दोनों के आधार पर दिन के अन्य मुहूर्त और धार्मिक कार्यों का समय निर्धारित किया जाता है।
पंचांग का महत्व
हिंदू पंचांग सिर्फ समय का ब्योरा नहीं है, यह जीवन के हर छोटे-बड़े फैसले को ज्योतिषीय दिशा देने वाला साधन है। इसमें तिथि, वार, योग, नक्षत्र और करण जैसे पाँच अंग शामिल होते हैं। इसके माध्यम से जीवन की दिशा, निर्णय और परिणाम में स्पष्टता लाई जा सकती है।